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भस्म का श्रृंगार : मोह-माया से विरक्ति के लिए…

भस्म का श्रृंगार : मोह-माया से विरक्ति के लिए… एक मान्यता के अनुसार शिव अपने शरीर पर चिता की राख मलते हैं और संदेश देते हैं कि आखिर में सब कुछ राख हो जाना है, ऐसे में सांसारिक चीज़ों को लेकर मोह-माया के वश में ना रहे और भस्म की तरह बनकर स्वयं को प्रभु […]

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तीर्थ शब्द का शास्त्रीय व्युत्पत्ति है – तीर्यते अनेनेति

तीर्थ शब्द का शास्त्रीय व्युत्पत्ति है – तीर्यते अनेनेति अथवा तरति पापादिकं यस्मादिति – जिससे पापादि से मुक्ति मिलती है। अथवा जिससे पार किया जाये। इनके अनुसार तीर्थ का अर्थ है पार करने वाला । पापादि से छुड़ानेवाले नदी, सरोवर, मन्दिर, पवि- त्र-स्थल, दिव्यभूमि आदि तीर्थ कहे जाते हैं। इनमे स्नान-दान, दर्शन, स्पर्शन, अवलोकन –

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