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Maximize Your Returns with the August 2023 Stock Market Horoscope

Are you ready to delve into the world of market astrology predictions for 2023? Worry not. We will help you explore the potential of using astrology to enhance your investment strategy. We will focus on the stock market astrology for the month of August 2023. Keep reading to know how it can help you make […]

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नाग पञ्चमी पूजा मन्त्र

सर्वे नागाः प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथ्वीतले. ये च हेलिमरीचिस्था येऽन्तरे दिवि संस्थिताः॥ ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिनः. ये च वापीतडगेषु तेषु सर्वेषु वै नमः ॥ अर्थ- इस संसार में, आकाश, स्वर्ग, झीलें, कुएं, तालाब तथा सूर्य-किरणों में निवास करने वाले सर्प, हमें आशीर्वाद दें और हम सभी आपको बार-बार नमन करते हैं. अनन्तं वासुकिं

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भस्म का श्रृंगार : मोह-माया से विरक्ति के लिए…

भस्म का श्रृंगार : मोह-माया से विरक्ति के लिए… एक मान्यता के अनुसार शिव अपने शरीर पर चिता की राख मलते हैं और संदेश देते हैं कि आखिर में सब कुछ राख हो जाना है, ऐसे में सांसारिक चीज़ों को लेकर मोह-माया के वश में ना रहे और भस्म की तरह बनकर स्वयं को प्रभु

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तीर्थ शब्द का शास्त्रीय व्युत्पत्ति है – तीर्यते अनेनेति

तीर्थ शब्द का शास्त्रीय व्युत्पत्ति है – तीर्यते अनेनेति अथवा तरति पापादिकं यस्मादिति – जिससे पापादि से मुक्ति मिलती है। अथवा जिससे पार किया जाये। इनके अनुसार तीर्थ का अर्थ है पार करने वाला । पापादि से छुड़ानेवाले नदी, सरोवर, मन्दिर, पवि- त्र-स्थल, दिव्यभूमि आदि तीर्थ कहे जाते हैं। इनमे स्नान-दान, दर्शन, स्पर्शन, अवलोकन –

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